Hindi Poems for Kids - Bal Kavita

Kids of all ages love poems due to their rhythmic nature and more so if it is in their mother tongue. Hindi has a rich tradition of beautiful kid poems (poems for children or bal kavitas). It is common to find even small kids reciting hindi poem (bal kavita) very enthusiastically.

Here is a collection of popular and famous hindi poems for kids and children.

  • [बढ़े चलो (Badhe Chalo)](/poems/...

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Desh Kagaz Par Bana Naksha Nahi Hota - Sarveshwar Dayal Saxena

देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता
- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

यदि तुम्हारे घर के
एक कमरे में आग लगी हो
तो क्या तुम
दूसरे कमरे में सो सकते हो?
यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में
लाशें सड़ रहीं हों
तो क्या तुम
दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो?
यदि हाँ
तो मुझे तुम से
कुछ नहीं कहना है।

देश कागज पर बना
नक्शा नहीं होता
कि एक हिस्से के फट जाने पर
बाकी हिस्से उसी तरह साबुत बने रहें
और नदियां, पर्वत, शहर, गांव...

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Surya Dhaltha Hi Nahi Hai - Ramdarsh Mishra

सूर्य ढलता ही नहीं है
- रामदरश मिश्र

चाहता हूँ, कुछ लिखूँ, पर कुछ निकलता ही नहीं है
दोस्त, भीतर आपके कोई विकलता ही नहीं है!

आप बैठे हैं अंधेरे में लदे टूटे पलों से
बंद अपने में अकेले, दूर सारी हलचलों से
हैं जलाए जा रहे बिन तेल का दीपक निरन्तर
चिड़चिड़ाकर कह रहे- 'कम्बख़्त,जलता ही नहीं है!'

बदलियाँ घिरतीं, हवाएँ काँपती, रोता अंधेरा
लोग गिरते, टूटते हैं, खोजते फिरते बसेरा
किन्तु रह-रहकर सफ़र में...

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Best Poems of Harivansh Rai Bachchan in Hindi (हरिवंशराय बच्चन हिंदी कविता)

Harivansh Rai Bachchan (27 November 1907 – 18 January 2003) was a famous hindi poet. Apart from a prolific writer, he was also known for his beautiful renderings in kavi sammelan. His most influential work remains मधुशाला (Madhushala). Here is a collection of poems from Harivansh Rai Bachchan.

Famous / Best poems of Harivansh Rai Bachchan

  • [है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है](/poems/...

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Agnipath (Agneepath) - Harivansh Rai Bachchan

अग्निपथ
- हरिवंश राय बच्चन

वृक्ष हों भले खड़े
हों घने, हों बड़े
एक पत्र छाँह भी
मांग मत! मांग मत! मांग मत!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

तू न थकेगा कभी
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी
कर शपथ! कर शपथ! कर शपथ!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

यह महान दृश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से
लथ-पथ! लथ-पथ! लथ-पथ!
अग्निपथ! अग्निपथ! अग्निपथ!

lyrics of Agnipath (Agneepath)

Vriksh hon bhale khade,
hon ...

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Ramdhari Singh Dinkar


Ramdhari Singh 'Dinkar' (रामधारी सिंह दिनकर) is one of the best hindi poets ever, famous for his 'veer ras' (heroism and positivity). He was born on 23 September 1908 and died on 24 April 1974 (aged 65).

His poetry has been used again and again by various activists and political leaders to represent feelings of indignation and action among ...

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Patriotic Poems (देशभक्ति की कविताएँ)

Patriotic poems (देशभक्ति की कविताएँ) have a unique hold on our minds and hearts as they convey our love and pride in the nation in a touching way. If projected properly, nationalism provides an immensely positive context and environment to live and operate, motivating us to do better day after day.

Below is a collection of patriotic poems in hindi (देशभक्ति की हिंदी कविताएँ):

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Teer Pe Kaise Ruku Mein, Aaj Leharo mein Nimantaran

तीर पर कैसे रुकूँ मैं आज लहरों में निमंत्रण
- हरिवंश राय बच्चन (Harivansh Rai Bachchan)

तीर पर कैसे रुकूँ मैं आज लहरों में निमंत्रण

आज सपनों को मैं सच बनाना चाहता हूं
दूर किसी कल्पना के पास जाना चाहता हूं।

रात का अंतिम प्रहर है, झिलमिलाते हैं सितारे,
वक्ष पर युग बाहु बाँधे मैं खड़ा सागर किनारे
वेग से बहता प्रभंजन केश-पट मेरे उड़ाता,
शून्य में भरता उदधि, उर की रहस्यमयी पुकारें,

इन पुकारों की प्रतिध्वनि हो रही मेरे हृदय में,
है प्रतिच्छायित जहाँ पर सिंधु का हिल्लोल - कंपन!

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Gandhi

गाँधी
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

देश में जिधर भी जाता हूँ,
उधर ही एक आह्वान सुनता हूँ
“जड़ता को तोड़ने के लिए
भूकम्प लाओ ।
घुप्प अँधेरे में फिर
अपनी मशाल जलाओ ।
पूरे पहाड़ हथेली पर उठाकर
पवनकुमार के समान तरजो ।
कोई तूफ़ान उठाने को
कवि, गरजो, गरजो, गरजो !”

सोचता हूँ, मैं कब गरजा था ?
जिसे लोग मेरा गर्जन समझते हैं,
वह असल में गाँधी का था,
उस गाँधी ...

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Aaj Paheli Baar

आज पहली बार (Aaj Paheli Baar)
- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwar Dayal Saxena)

आज पहली बार
थकी शीतल हवा ने
शीश मेरा उठा कर
चुपचाप अपनी गोद में रक्खा
और जलते हुए मस्तक पर
काँपता सा हाथ रख कर कहा
"सुनो, मैं भी पराजित हूँ
सुनो, मैं भी बहुत भटकी हूँ
सुनो, मेरा भी नहीं कोई
सुनो, मैं भी कहीं अटकी हूँ
पर न जाने क्यों
पराजय नें मुझे शीतल किया
और हर भटकाव ने गति दी
नहीं कोई था
इसी से सब हो गए मेरे
मैं ...

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