कलम, आज उनकी जय बोल
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)
जो अगणित लघु दीप हमारे
तुफानों में एक किनारे
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल
कलम, आज उनकी जय बोल
पीकर जिनकी लाल शिखाएं
उगल रही लपट दिशाएं
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल
कलम, आज उनकी जय बोल
Recent comments
6 days 6 hours ago
6 days 13 hours ago
1 week 5 days ago
1 week 6 days ago
1 week 6 days ago
2 weeks 11 hours ago
2 weeks 6 days ago
2 weeks 6 days ago
2 weeks 6 days ago
3 weeks 1 day ago