Yeh Diya Bhujhe Nahi

यह दिया बुझे नहीं
- गोपाल सिंह नेपाली (Gopal Singh Nepali)

यह दिया बुझे नहीं

घोर अंधकार हो
चल रही बयार हो
आज द्वार–द्वार पर यह दिया बुझे नहीं
यह निशीथ का दिया ला रहा विहान है।

शक्ति का दिया हुआ
शक्ति को दिया हुआ
भक्ति से दिया हुआ
यह स्वतंत्रता–दिया

रूक रही न नाव हो
जोर का बहाव हो
आज गंग–धार पर यह दिया बुझे नहीं
यह स्वदेश का दिया प्राण के समान है।

यह अतीत कल्पना
यह विनीत प्रार्थना
यह पुनीत भावना
यह अनंत साधना

शांति हो, अशांति हो
युद्ध, संधि, क्रांति हो
तीर पर¸ कछार पर¸ यह दिया बुझे नहीं
देश पर, समाज पर, ज्योति का वितान है।

तीन–चार फूल है
आस–पास धूल है
बांस है –बबूल है
घास के दुकूल है

वायु भी हिलोर दे
फूंक दे, चकोर दे
कब्र पर मजार पर, यह दिया बुझे नहीं
यह किसी शहीद का पुण्य–प्राण दान है।

झूम–झूम बदलियाँ
चूम–चूम बिजलियाँ
आंधिया उठा रहीं
हलचलें मचा रहीं

लड़ रहा स्वदेश हो
यातना विशेष हो
क्षुद्र जीत–हार पर, यह दिया बुझे नहीं
यह स्वतंत्र भावना का स्वतंत्र गान है।

Comments

यह दिया बुझे नहीं

सचमुच ऐसे भावों के साथ शब्दों को पिरोने वालों का मेरा शत शत प्रणाम!
जिस भमि पर ऐसे भावों के साथ राह दिखने वालें हो तो कोई भी दिया नहीं बुझेगा!
ईश्वर हमें ऐसे भावों के साथ जीने की द्रिस्थी और संकल्प शक्ति दे.
मैंने पहली पर पढ़ा ...बल्कि पढ़ा नहीं पूरा गीत अंतरात्मा के साथ गया...सचमुच आज सुबह का सर्वोत्तम आनद प्राप्त हुआ.
एक बार पुनः मेरा शत शत प्रणाम.

wow

i too have a small poem
topic = life
world is beatiful
life is wonderful
so enjoy your life full full full

flowers blossem
life is ossem
see the sky blue
it looks like all new
mothers cook and fry
oh baby you dont cry

world is beatiful
life is wonderful
so enjoy your life full full full

nice

Dear authr,
ur poem is very nice... i need to read more of ur poem, acctually i m also writing poems nd ghazals, we can exchange our poetic thought if u wish...
plz do reply to - vaibhavanand2@gmail.com
vaibhav

what an excellent poem

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Ek bhavpurna kavita.Naya

Ek bhavpurna kavita.Naya josh bhar deti hai.

want to read here

hello i visited this site first time, got it very nice... but unfortuntly i havnt find tht old poem of gopal singh nepali's "nau laakh sitaron ne luta" which is published in dharmayuga magzine in 60ees/ if u publish tht poem thn we'll gratfull of ur site...
regards
vaibhav

दिल है ,

दिल है , जहान है ,
यह प्रेम गीत गान है ,
इस गीत की यह भावना
सौ ग्रन्थ समान है .

धार यह रुके नहीं .
समय की यह मांग है .