Maine Aahuti bankar Dekha

मैंने आहुति बन कर देखा
- अज्ञेय (Sachchidananda Hirananda Vatsyayana 'Agyeya')

मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने,
मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नंदन-कानन का फूल बने?
काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें उसकी मर्यादा है,
मैं कब कहता हूँ वह घटकर प्रांतर का ओछा फूल बने?

मैं कब कहता हूँ मुझे युद्ध में कहीं न तीखी चोट मिले?
मैं कब कहता हूँ प्यार करूँ तो मुझे प्राप्ति की ओट मिले?
मैं कब कहता हूँ विजय करूँ मेरा ऊँचा प्रासाद बने?
या पात्र जगत की श्रद्धा की मेरी धुंधली-सी याद बने?

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Inklab ke Geet Sunane Wala Hoon

कलमकार हूँ इन्कलाब के गीत सुनाने वाला हूँ
- हरिओम पंवार (Hari Om Panwar)

बहुत दिनों के बाद छिड़ी है वीणा की झंकार अभय
बहुत दिनों के बाद समय ने गाया मेघ मल्हार अभय
बहुत दिनों के बाद किया है शब्दों ने श्रृंगार अभय
बहुत दिनों के बाद लगा है वाणी का दरबार अभय
बहुत दिनों के बाद उठी है प्राणों में हूंकार अभय
बहुत दिनों के बाद मिली है अधरों को ललकार अभय

मैं यथार्थ का शिला लेख हूँ भोजपत्र वरदानों का
चिंतन में दर्पण हूँ भारत के घायल अरमानों का

इसी लिए मैं शंखनाद कर अलख जगाने वाला हूँ
अग्निवंश के चारण कुल की भाषा गाने वाला हूँ
कलमकार हूँ इन्कलाब के गीत सुनाने वाला हूँ
कलमकार हूँ कलमकार का धर्म निभाने वाला हूँ

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Mukti ki Aakansha

मुक्ति की आकांक्षा
- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना (Sarveshwar Dayal Saxena)

चिड़िया को लाख समझाओ
कि पिंजड़े के बाहर
धरती बहुत बड़ी है, निर्मम है,
वहॉं हवा में उन्‍हें
अपने जिस्‍म की गंध तक नहीं मिलेगी।

यूँ तो बाहर समुद्र है, नदी है, झरना है,
पर पानी के लिए भटकना है,
यहॉं कटोरी में भरा जल गटकना है।

बाहर दाने का टोटा है,
यहॉं चुग्‍गा मोटा है।
बाहर बहेलिए का डर है,
यहॉं निर्द्वंद्व कंठ-स्‍वर है।

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Swaraj by Arvind Kejriwal

Swaraj by Arvind Kejriwal (स्वराज - अरविन्द केजरीवाल) is a well written and thought provoking book on how we can take India forward. Please find below links for e-book version of this book in Hindi and English. A must read.

Tum Chalo to Hindustan Chale

तुम चलो तो हिंदुस्तान चले
- गुलज़ार (Gulzar)

In support of Anna Ji and Team. Let's all join Anna Hazare Ji and India against corruption in their fight for a better india!
(Thanks to Ourchitr for referencing this poem)

फलक पकड़ के उठो और हवा पकड़ के चलो
तुम चलो तो हिंदुस्तान चले

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Khooni Hastakshar

खूनी हस्‍ताक्षर
- गोपालप्रसाद व्यास (Gopalprasad Vyas)

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं ।

वह खून कहो किस मतलब का
जिसमें जीवन, न रवानी है ।
जो परवश होकर बहता है,
वह खून नहीं, पानी है ।

उस दिन लोगों ने सही-सही
खून की कीमत पहचानी थी ।
जिस दिन सुभाष ने बर्मा में
मॉंगी उनसे कुरबानी थी ।

बोले, "स्वतंत्रता की खातिर
बलिदान तुम्हें करना होगा ।
तुम बहुत जी चुके जग में,
लेकिन आगे मरना होगा ।

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Krishna ki Chetavani

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कृष्ण की चेतावनी (रश्मिरथी)
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम,
सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है,
देखें, आगे क्या होता है।

Today is the 'World Day against Child labour'

Topic: 

Found a very nice and thought provoking article on Internet today. It inspires us to take action as an individual in bringing about the change we wish to see in society.

जिस्म तो बहुत संवर चुके, रूह का सिंगार कीजिये|
फूल शाख से ना तोड़िए, खुशबूओं से प्यार कीजिये|

Darbar - e - watan Mein Jab Ik Din

दरबारे वतन में जब इक दिन
- फैज़ अहमद फैज़ (Faiz Ahmed Faiz)

दरबारे वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जायेंगे
कुछ अपनी सजा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी जजा ले जायेंगे

ऐ खाकनशीनों उठ बैठो, वो वक़्त करीब आ पहुंचा है
जब तख़्त गिराए जायेंगे, जब ताज उछाले जायेंगे

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Samar Shesh Hai

समर शेष है
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

ढीली करो धनुष की डोरी, तरकस का कस खोलो
किसने कहा, युद्ध की बेला गई, शान्ति से बोलो?
किसने कहा, और मत बेधो हृदय वह्नि के शर से
भरो भुवन का अंग कुंकुम से, कुसुम से, केसर से?

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