Aag Ki Bheek

आग की भीख
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा
कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा
कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है
मुंह को छिपा तिमिर में क्यों तेज सो रहा है
दाता पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे
बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे
प्यारे स्वदेश के हित अँगार माँगता हूँ
चढ़ती जवानियों का श्रृंगार मांगता हूँ

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Arya by Maithili Sharan Gupt

आर्य
- मैथिलीशरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt)

हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी
आओ विचारें आज मिल कर, यह समस्याएं सभी

भू लोक का गौरव, प्रकृति का पुण्य लीला स्थल कहां
फैला मनोहर गिरि हिमालय, और गंगाजल कहां
संपूर्ण देशों से अधिक, किस देश का उत्कर्ष है
उसका कि जो ऋषि भूमि है, वह कौन, भारतवर्ष है

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Aag Jalthi Rahe

आग जलती रहे
- दुष्यंत कुमार (Dushyant Kumar)

एक तीखी आँच ने
इस जन्म का हर पल छुआ,
आता हुआ दिन छुआ
हाथों से गुजरता कल छुआ
हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा,
फूल-पत्ती, फल छुआ
जो मुझे छुने चली
हर उस हवा का आँचल छुआ

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Khoob Ladi Murdani Voh To Jhansi Wali Rani Thi

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी
- Subhadra Kumari Chauhan

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी
बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी

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Kyonki Sapna Hai Abhi Bhi

क्योंकि सपना है अभी भी
- धर्मवीर भारती (Dharamvir Bharti)

...क्योंकि सपना है अभी भी
इसलिए तलवार टूटी अश्व घायल
कोहरे डूबी दिशाएं
कौन दुश्मन, कौन अपने लोग, सब कुछ धुंध धूमिल
किन्तु कायम युद्ध का संकल्प है अपना अभी भी
...क्योंकि सपना है अभी भी!

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Kalam Aaj Unki Jai Bol

कलम, आज उनकी जय बोल
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)

जो अगणित लघु दीप हमारे
तुफानों में एक किनारे
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
मांगा नहीं स्नेह मुंह खोल
कलम, आज उनकी जय बोल

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The Song of the Free

The Song of the Free
- Swami Vivekananda

The wounded snake its hood unfurls,
The flame stirred up doth blaze,
The desert air resounds the calls
Of heart-struck lion's rage.

The cloud puts forth it deluge strength
When lightning cleaves its breast,
When the soul is stirred to its in most depth
Great ones unfold their best.

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Haif Hum Jispe Ki Tayaar The Mar Jane Ko

हैफ हम जिसपे की तैयार थे मर जाने को
- Ram Prasad Bismil

(Note: It's not the complete poem. Few portions are missing here. Will try to get the complete poem soon.)

हैफ हम जिसपे की तैयार थे मर जाने को
जीते जी हमने छुड़ाया उसी कशाने को
क्या ना था और बहाना कोई तडपाने को
आसमां क्या यही बाकी था सितम ढाने को
लाके गुरबत में जो रखा हमें तरसाने को

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Hai Andheri Raat Par Diva Jalana Kab Mana Hai

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है
- Harivansh Rai Bachchan

कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था
भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था

स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा
स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था
ढह गया वह तो जुटाकर ईंट, पत्थर, कंकड़ों को
एक अपनी शांति की कुटिया बनाना कब मना है
है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है

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Mujko Bhi Tarkeeb Shika Yaar Julahe

मुझको भी तरकीब सिखा यार जुलाहे
- Gulzar

अकसर तुझको देखा है कि ताना बुनते
जब कोइ तागा टुट गया या खत्म हुआ
फिर से बांध के
और सिरा कोई जोड़ के उसमे
आगे बुनने लगते हो
तेरे इस ताने में लेकिन
इक भी गांठ गिराह बुन्तर की
देख नहीं सकता कोई

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