Now-a-days most linux distributions support reading and writing in any unicode language easily. Following are the instructions for enabling hindi support in Ubuntu (it's based on Ubuntu Edgy, but I think it's same for Dapper).
Reading Hindi Websites
By default, Firefox will show unicode hindi font based websites, but font is all garbled - especially 'choti e ki matra' is rendered incorrectly...
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ
- शिवमंगल सिंह सुमन (Shiv Mangal Singh Suman)
मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ ।
चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तमिस्त्रा चूर होती
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ पा जाता समय का ।
नर हो न निराश करो मन को
- मैथिलीशरण गुप्त (Maithili Sharan Gupt)
नर हो न निराश करो मन को
कुछ काम करो कुछ काम करो
जग में रहके निज नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो न निराश करो मन को ।
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
- मिर्जा गालिब (Mirza Ghalib)
हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले
डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन पर
वो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले
Where the mind is without fear and the head is held high
Where knowledge is free
Where the world has not been broken up into fragments
By narrow domestic walls
परिचय
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)
सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं
स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं
बँधा हूँ, स्वपन हूँ, लघु वृत हूँ मैं
नहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैं
समाना चाहता है, जो बीन उर में
विकल उस शुन्य की झनंकार हूँ मैं
भटकता खोजता हूँ, ज्योति तम में
सुना है ज्योति का आगार हूँ मैं
वन्दे मातरम्
- बंकिमचंद्र चॅटर्जी
वन्दे मातरम्। वन्दे मातरम्॥
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्य श्यामलां मातरंम् .
शुभ्र ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम
फुल्ल कुसुमित द्रुमदलशोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम् .
सुखदां वरदां मातरम् ॥
आग की भीख
- रामधारी सिंह दिनकर (Ramdhari Singh Dinkar)
धुँधली हुई दिशाएँ, छाने लगा कुहासा
कुचली हुई शिखा से आने लगा धुआँसा
कोई मुझे बता दे, क्या आज हो रहा है
मुंह को छिपा तिमिर में क्यों तेज सो रहा है
दाता पुकार मेरी, संदीप्ति को जिला दे
बुझती हुई शिखा को संजीवनी पिला दे
प्यारे स्वदेश के हित अँगार माँगता हूँ
चढ़ती जवानियों का श्रृंगार मांगता हूँ
अब दो महीने बाद ही सही - मैं इस ब्लोग पर दुबारा हाजिर हूँ । इसका सारा श्रेय जाता है हिन्दी के द्विगज चिट्ठकारों को । पिछले सप्ताह किसी तरह हिन्दी चिट्ठकारों को इस ब्लोग की भनक लग गई, और लग पड़ा टिप्पणियों का ताता । मित्रों, आप सबकी हौसला-अफजाही के लिये बहुत बहुत धन्यवाद ।
वेसे मैं एकदम निक्ठा भी नही रहा । मैं हिन्दी की कुछ प्रसिद्ध कविताओं को युनिकोड हिन्दी में लिखने में लगा हुआ था । कविता की कवि...
Calling cards have been the best option for calling to india since long ( Calling Cards are another name for pre-paid cards ). There are two main options here - the ones that are available in your local india shopping stores (let's call them retail cards), and the ones you have to buy online.
Before we go ahead, let's clearly understand the basic terminology used for describing these cards...