Ganesh Shankar Vidyarthi

Ganesh Shankar Vidyarthi is a great revolutionary and journalist of India from pre-independence time. He was born in 1890 and died in 1931...

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Himadri Tung Shring Se

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
- जयशंकर प्रसाद (JaiShankar Prasad)
- video from 'Chanakya' serial directed by Chandra Prakash Dwivedi

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयंप्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती
अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो
प्रशस्त पुण्य पंथ हैं - बढ़े चलो बढ़े चलो

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Anna Hazare's Talk - Jun 2007

Anna Hazare ji gave a wonderful talk in Gayatri Parivar Youth Camp at
Ralegan Siddhi on Jun 9, 2007. A must watch.

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Moko Kahan Dhundhe Re Bande

मोको कहां ढूढे रे बन्दे
- कबीर (Kabir)
- English translation by Rabindranath Tagore

मोको कहां ढूढे रे बन्दे
मैं तो तेरे पास में

ना तीर्थ मे ना मूर्त में
ना एकान्त निवास में
ना मंदिर में ना मस्जिद में
ना काबे कैलास में

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Badhe Chalo, Badhe Chalo

बढ़े चलो, बढ़े चलो
- सोहन लाल द्विवेदी (Sohan Lal Dwivedi)

न हाथ एक शस्त्र हो,
न हाथ एक अस्त्र हो,
न अन्न वीर वस्त्र हो,
हटो नहीं, डरो नहीं,
बढ़े चलो, बढ़े चलो

रहे समक्ष हिम-शिखर,
तुम्हारा प्रण उठे निखर,
भले ही जाए जन बिखर,
रुको नहीं, झुको नहीं,
बढ़े चलो, बढ़े चलो

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Soh Na Saka

'So Na Saka'
- Ramanath Awasti

सो न सका कल याद तुम्हारी आई सारी रात
और पास ही बजी कहीं शहनाई सारी रात
मेरे बहुत चाहने पर भी नींद न मुझ तक आई
ज़हर भरी जादूगरनी-सी मुझको लगी जुन्हाई
मेरा मस्तक सहला कर बोली मुझसे पुरवाई
दूर कहीं दो आँखें भर-भर आई सारी रात
और पास ही बजी कहीं शहनाई सारी रात

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Veer Tum Badhe Chalo

बढ़े चलो
-द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी

वीर तुम बढ़े चलो
धीर तुम बढ़े चलो

साथ में ध्वजा रहे
बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं
दल कभी रुके नहीं

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Aur Bhi Doon

और भी दूँ
- रामावतार त्यागी (Ram Avtar Tyagi)

मन समर्पित, तन समर्पित
और यह जीवन समर्पित
चाहता हूँ देश की धरती, तुझे कुछ और भी दूँ

मॉं तुम्हारा ऋण बहुत है, मैं अकिंचन
किंतु इतना कर रहा, फिर भी निवेदन
थाल में लाऊँ सजाकर भाल में जब भी
कर दया स्वीकार लेना यह समर्पण

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Ek Bhi Aanshu Na Kar Bekar

एक भी आँसू न कर बेकार
- रामावतार त्यागी (Ram Avtar Tyagi)

एक भी आँसू न कर बेकार
जाने कब समंदर मांगने आ जाए!

पास प्यासे के कुआँ आता नहीं है
यह कहावत है, अमरवाणी नहीं है
और जिस के पास देने को न कुछ भी
एक भी ऐसा यहाँ प्राणी नहीं है

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Hum Panchhi Unmukt Gagan Ke

हम पंछी उन्मुक्त गगन के
- ShivMangal Singh Suman (शिवमंगल सिंह सुमन)

हम पंछी उन्मुक्त गगन के
पिंजरबद्ध न गा पाऍंगे
कनक-तीलियों से टकराकर
पुलकित पंख टूट जाऍंगे ।

हम बहता जल पीनेवाले
मर जाऍंगे भूखे-प्यासे
कहीं भली है कटुक निबोरी
कनक-कटोरी की मैदा से ।

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